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धारा 259 CrPC | Section 259 CrPC in Hindi | CrPC Section 259

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “समन-मामलों को वारण्ट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 259 क्या है | section 259 CrPC in Hindi | Section 259 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 259 | Power of Court to convert summons-cases into warrant cases के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 259 |  Section 259 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 259 in Hindi ] –

समन-मामलों को वारण्ट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति–

जब किसी ऐसे अपराध से संबंधित समनमामले के विचारण के दौरान जो छह मास से अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय है, मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के हित में उस अपराध का विचारण वारण्ट-मामलों के विचारण की प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए तो ऐसा मजिस्ट्रेट वारण्ट-मामलों के विचारण के लिए इस संहिता द्वारा उपबंधित रीति से उस मामले की पुनः सुनवाई कर सकता है और ऐसे साक्षियों को पुनः बुला सकता है जिनकी परीक्षा की जा चुकी है।

धारा 259 CrPC

[ CrPC Sec. 259 in English ] –

“Power of Court to convert summons-cases into warrant cases”–

When in the course of the trial of a summons-case relating to an offence punishable with imprisonment for a term exceeding six months, it appears to the Magistrate that in the interests of justice, the offence should be tried in accordance with the procedure for the trial of warrant-cases, such Magistrate may proceed to re-hear the case in the manner provided by this Code for the trial of warrant-cases and may recall any witness who may have been examined.

धारा 259 CrPC

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