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धारा 258 CrPC | Section 258 CrPC in Hindi | CrPC Section 258

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section 258 CrPC in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “कुछ मामलों में कार्यवाही रोक देने की शक्ति | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 258 क्या है | section 258 CrPC in Hindi | Section 258 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 258 | Power to stop proceedings in certain cases के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 258 |  Section 258 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 258 in Hindi ] –

कुछ मामलों में कार्यवाही रोक देने की शक्ति-

परिवाद से भिन्न आधार पर संस्थित किसी समन-मामले में कोई प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट, अथवा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऐसे कारणों से, जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, कार्यवाही को किसी भी प्रक्रम में कोई निर्णय सुनाए बिना रोक सकता है और जहां मुख्य साक्षियों के साक्ष्य को अभिलिखित किए जाने के पश्चात् इस प्रकार कार्यवाहियां रोकी जाती हैं वहाँ दोषमुक्ति का निर्णय सुना सकता है और किसी अन्य दशा में अभियुक्त को छोड़ सकता है और ऐसे छोड़ने का प्रभाव उन्मोचन होगा।

धारा 258 CrPC

[ CrPC Sec. 258 in English ] –

“Power to stop proceedings in certain cases”–

 In any summons- case instituted otherwise than upon complaint, a Magistrate of the first class or, with the previous sanction of the Chief Judicial Magistrate, any other Judicial Magistrate, may, for reasons to be recorded by him, stop the proceedings at any stage without pronouncing any judgment and where such stoppage of proceedings is made after the evidence of the principal witnesses has been recorded, pronounce a judgment of acquittal, and in any other case, release the accused, and such release shall have the effect of discharge.

धारा 258 CrPC

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