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कंपनी अधिनियम धारा 25 | Section 25 of Companies Act in Hindi

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Section 25 of Companies Act in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपको ” विक्रय के लिए प्रतिभूतियों की प्रतिस्थापना वाले दस्तावेजों को प्रास्पेक्टस समझा जाना  | कंपनी अधिनियम धारा 25  | Section 25 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 25 | के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 25 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 25 in Hindi ] –

विक्रय के लिए प्रतिभूतियों की प्रतिस्थापना वाले दस्तावेजों को प्रास्पेक्टस समझा जाना

(1) जहां कोई कंपनी, कंपनी में किन्हीं प्रतिभूतियों को, उन सभी या किन्हीं प्रतिभूतियों को जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना करने की दृष्टि से आबंटित या आबंटित करने का करार करती है, वहां ऐसा कोई दस्तावेज, जिसके द्वारा जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना की जाती है, सभी प्रयोजनों के लिए, कंपनी द्वारा जारी किया गया प्रास्पेक्टस समझा जाएगा और प्रास्पेक्टस की अंतर्वस्तुओं के बारे में तथा प्रास्पेक्टस में के अशुद्ध कथनों और उससे लोपों की बाबत या अन्यथा प्रास्पेक्टस से संबंधित दायित्व के बारे में सभी अधिनियमितियां और विधि के नियम, उपधारा (3) और उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट उपांतरणों सहित लागू होंगे और तदनुसार, इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो प्रतिभूतियां अभिदाय के लिए जनता को प्रस्थापित की गई थीं और मानो किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत प्रस्थापना स्वीकार करने वाले व्यक्ति, उन प्रतिभूतियों के लिए अभिदायी थे, किंतु उन व्यक्तियों के दायित्व पर, यदि कोई हो, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिनके द्वारा दस्तावेज में अंतर्विष्ट अशुद्ध कथनों के संबंध में या उसकी बाबत अन्यथा प्रस्थापना की जाती है |

(2) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, जब तक प्रतिकूल साबित न किया गया हो, यह इस बात का साक्ष्य होगा कि प्रतिभूतियों का कोई आबंटन या आबंटन करने का करार प्रतिभूतियों को जनता के लिए विक्रय हेतु प्रस्थापित करने की दृष्टि से किया गया था, यदि यह दर्शित किया जाता है कि,

(क) प्रतिभूतियों की या उनमें से किसी की जनता के लिए विक्रय की प्रस्थापना, आबंटन या आबंटन करने के करार के पश्चात् छह मास के भीतर की गई थी: या

(ख) उस तारीख को, जब प्रस्थापना की गई थी, प्रतिभूतियों के संबंध में कंपनी द्वारा प्राप्त किया जाने वाला संपूर्ण प्रतिफल उसके द्वारा प्राप्त नहीं किया गया था। (3) इस धारा द्वारा यथा लागू की गई धारा 26 इस प्रकार प्रभावी होगी, मानो

(i) किसी प्रास्पेक्टस से, किसी प्रास्पेक्टस में कथित किए जाने के लिए उस धारा द्वारा अपेक्षित विषयों के अतिरिक्त,

(क) ऐसी प्रतिभूतियों के संबंध में, जिससे प्रस्थापना संबंधित है, कंपनी द्वारा प्राप्त या प्राप्त किए जाने वाले प्रतिफल की शुद्ध रकम; और

(ख) वह समय और स्थान, जहां पर उस संविदा का, जिसके अधीन उक्त प्रतिभूतियां आबंटित की गई हैं या आंबटित की जानी हैं, निरीक्षण किया जा सकेगा, कथित करने की अपेक्षा की गई है।

(ii) प्रस्थापना करने वाले व्यक्ति, प्रास्पेक्टस में कंपनी के निदेशकों के रूप में नामित व्यक्ति थे ।

(4) जहां ऐसी प्रस्थापना करने वाला कोई व्यक्ति, जिससे यह धारा संबंधित है, कोई कंपनी या फर्म है वहां यह पर्याप्त होगा, यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट दस्तावेज, यथास्थिति, कंपनी या फर्म की ओर से कंपनी के दो निदेशकों द्वारा या फर्म में भागीदार आधे से अन्यून भागीदारों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया हो ।

कंपनी अधिनियम धारा 25

[ Companies Act Section 25  in English ] –

Document containing offer of securities for sale to be deemed prospectus”–

(1) Where a  company allots or agrees to allot any securities of the company with a view to all or any of those  securities being offered for sale to the public, any document by which the offer for sale to the public is  made shall, for all purposes, be deemed to be a prospectus issued by the company; and all enactments and  rules of law as to the contents of prospectus and as to liability in respect of mis-statements, in and  omissions from, prospectus, or otherwise relating to prospectus, shall apply with the modifications  specified in subsections (3) and (4) and shall have effect accordingly, as if the securities had been offered to the public for subscription and as if persons accepting the offer in respect of any securities were  subscribers for those securities, but without prejudice to the liability, if any, of the persons by whom the  offer is made in respect of mis-statements contained in the document or otherwise in respect thereof. 

(2) For the purposes of this Act, it shall, unless the contrary is proved, be evidence that an allotment  of, or an agreement to allot, securities was made with a view to the securities being offered for sale to the  public if it is shown— 

(a) that an offer of the securities or of any of them for sale to the public was made within six  months after the allotment or agreement to allot; or 

(b) that at the date when the offer was made, the whole consideration to be received by the  company in respect of the securities had not been received by it. 

(3) Section 26 as applied by this section shall have effect as if — 

(i) it required a prospectus to state in addition to the matters required by that section to be stated  in a prospectus— 

(a) the net amount of the consideration received or to be received by the company in respect  of the securities to which the offer relates; and 

(b) the time and place at which the contract where under the said securities have been or are  to be allotted may be inspected; 

(ii) the persons making the offer were persons named in a prospectus as directors of a company. 

(4) Where a person making an offer to which this section relates is a company or a firm, it shall be  sufficient if the document referred to in sub-section (1) is signed on behalf of the company or firm by two  directors of the company or by not less than one-half of the partners in the firm, as the case may be.

कंपनी अधिनियम धारा 25


कंपनी अधिनियम 2013  

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