धारा 18 घरेलू हिंसा | Section 18 Domestic violence act in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “संरक्षण आदेश  | घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 18 क्या है | Section 18 Domestic violence act in Hindi | Section 18 of Domestic violence act | धारा 18 घरेलू हिंसा अधिनियम | Protection orders ” के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 18 |  Section 18 of Domestic violence act

[ Domestic violence act Sec. 18 in Hindi ] –

संरक्षण आदेश.-

मजिस्ट्रेट, व्यथित व्यक्ति और प्रत्यर्थी को सुनवाई का एक अवसर दिए जाने के पश्चात् और उसका प्रथम दृष्टया समाधान होने पर कि घरेलू हिंसा हुई है या होने वाली है, व्यथित व्यक्ति के पक्ष में तथा प्रत्यर्थी को निम्नलिखित से प्रतिषिद्ध करते हुए एक संरक्षण आदेश पारित कर सकेगा,

(क) घरेलू हिंसा के किसी कार्य को करना;

(ख) घरेलू हिंसा के कार्यों के कारित करने में सहायता या दुष्प्रेरित करना;

(ग) व्यथित व्यक्ति के नियोजन के स्थान में या यदि व्यथित व्यक्ति बालक है, तो उसके विद्यालय में या किसी अन्य स्थान में जहाँ व्यथित बार-बार आता जाता है, प्रवेश करना;

(घ) व्यथित व्यक्ति से सम्पर्क करने का प्रयत्न करना, चाहे वह किसी रूप में हो, इसके अन्तर्गत वैयक्तिक, मौखिक या लिखित या इलैक्ट्रॉनिक या दूरभाषीय सम्पर्क भी हैं :

(ङ)किन्हीं आस्तियों का अन्य सं.मण करना; उन बैंक लाकरों या बैंक खातों का प्रचालन करना जिनका दोनों पक्षों द्वारा प्रयोग या धारण या उपयोग, व्यथित व्यक्ति और प्रत्यर्थी द्वारा संयुक्तत: या प्रत्यर्थी द्वारा अकेले किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत उसका स्त्रीधन या अन्य कोई सम्पत्ति भी है, जो मजिस्ट्रेट की इजाजत के बिना या तो पक्षकारों द्वारा संयुक्तत: या उनके द्वारा पृथकत: धारित की हुई हैं :

(च) आश्रितों, अन्य नातेदारों या किसी ऐसे व्यक्ति को जो व्यथित व्यक्ति को घरेलू हिंसा के विरुद्ध सहायता देता है, के साथ हिंसा कारित करना;

(छ) ऐसा कोई अन्य कार्य करना जो संरक्षण आदेश में विनिर्दिष्ट किया गया है।

धारा 18 Domestic violence act

[ Domestic violence act Sec. 18 in English ] –

Protection orders  ”–

The Magistrate may, after giving the aggrieved person and the respondent an opportunity of being heard and on being prima facie satisfied that domestic 

violence has taken place or is likely to take place, pass a protection order in favor of the aggrieved person and prohibit the respondent from- 

(a) committing any act of domestic violence; 

(b) aiding or abetting in the commission of acts of domestic violence; 

(c) entering the place of employment of the aggrieved person or, if the person aggrieved is a child, its school or any other place frequented by the aggrieved person; 

(d) attempting to communicate in any form, whatsoever, with the aggrieved person, including personal, oral or written or electronic or telephonic contact; 

(e) alienating any assets, operating bank lockers or bank accounts used or held or enjoyed by both the parties, jointly by the aggrieved person and the respondent or singly by the respondent, including her stridhan or any other property held either jointly by the parties or separately by them without the leave of the Magistrate; 

(f) causing violence to the dependants, other relatives or any person who give the aggrieved person assistance from domestic violence; 

(g) committing any other act as specified in the protection order. 

धारा 18 Domestic violence act

घरेलू हिंसा अधिनियम 

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Domestic violence act 

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Dowry prohibition act 1961 PDFDowry prohibition act 1961 PDF
Updated: May 13, 2020 — 6:51 pm

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