धारा 177 संविदा अधिनियम | Section 177 Indian Contract act in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “व्यतिक्रम करने वाले पणयमकार का मोचनाधिकार | भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 177 क्या है | Section 177 Indian Contract act in Hindi | Section 177 of Indian Contract act | धारा 177 भारतीय संविदा अधिनियम | Defaulting pawner’s right to redeemके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 177 |  Section 177 of Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 177 in Hindi ] –

व्यतिक्रम करने वाले पणयमकार का मोचनाधिकार—

यदि उस ऋण के संदाय या उस वचन के पालन के लिए, जिसके लिए गिरवी की गई है, कोई समय अनुबद्ध हो, और पणयमकार ऋण का संदाय या वचन का पालन अनुबद्ध समय पर करने में व्यतिक्रम करे तो वह किसी भी पश्चात्वर्ती समय में इसके पूर्व कि गिरवी माल का वस्तुतः विक्रय हो, उसका मोचन करा सकेगा, किन्तु ऐसी दशा में उसे ऐसे अतिरिक्त व्ययों का, जो उसके व्यतिक्रम से हुए हों, संदाय करना होगा।

धारा 177 Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 177  in English ] –

“Defaulting pawner’s right to redeem”–

If a time is stipulated for the payment of the debt, of performance of the promise, for which the pledge is made, and the pawnor makes default in payment of the debt or performance of the promise at the stipulated time, he may redeem the goods pledged at any subsequent time before the actual sale of them2; but he must, in that case, pay, in addition, any expenses which have arisen from his default.

धारा 177 Indian Contract act

भारतीय संविदा अधिनियम 

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Section 1 of limitation actSection 1 of limitation act
Updated: May 10, 2020 — 8:51 pm

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