Home LAW धारा 17 परिसीमा अधिनियम | Section 17 of limitation act in Hindi

धारा 17 परिसीमा अधिनियम | Section 17 of limitation act in Hindi

2270
0

आज के इस आर्टिकल में मै आपको  कपट या भूल का प्रभाव | परिसीमा अधिनियम की धारा 17 क्या है | Section 17 limitation act in Hindi | Section 17 of limitation act | धारा 17 परिसीमा अधिनियम |  Effect of fraud or mistakeके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

परिसीमा अधिनियम की धारा 17 |  Section 17 of limitation act

[ limitation act Sec. 17 in Hindi ] –

 कपट या भूल का प्रभाव–

(1) जहां कि किसी ऐसे वाद या आवेदन के मामले में, जिसके लिए इस अधिनियम द्वारा कोई परिसीमा काल विहित है

(क) वह वाद या आवेदन प्रतिवादी या प्रत्यर्थी या उसके अभिकर्ता के कपट पर आधारित है ; अथवा

(ख) उस अधिकार या हक का ज्ञान, जिस पर वाद या आवेदन आधारित है, किसी यथापूर्वोक्त व्यक्ति के कपट द्वारा छिपाया गया है ; अथवा

(ग ) वह वाद या आवेदन किसी भूल के परिणाम से मुक्ति के लिए है ; अथवा

(घ ) बादी या आवेदक के अधिकार को स्थापित करने के लिए आवश्यक कोई दस्तावेज उससे कपटपूर्वक छिपाई गई है,

वहाँ परिसीमा काल का चलना तब तक के बिना आरम्भ न होगा जब वादी या आवेदक को उस कपट या भूल का पता चल न जाए या सम्यक् तत्परता से पता चल सकता था, अथवा छिपाई गई दस्तावेज की दशा में तब तक के बिना आरम्भ न होगा, जबकि छिपाई गई दस्तावेज के पेश करने या उसका पेश किया जाना विवश करने के साधन वादी या आवेदक को सर्वप्रथम प्राप्त न हुए हों :

परन्तु इस धारा की कोई भी बात किसी ऐसी सम्पत्ति के प्रत्युद्धरण के या उसके विरुद्ध कोई भार प्रवर्तित कराने के या तत्संबंधी किसी संव्यवहार को अपास्त कराने के बाद का संस्थित किया जाना या आवेदन का किया जाना शक्य नहीं बनाएगी जो-

(i) कपट के मामले में, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा मूल्यवान प्रतिफलेन क्रय की गई हो जिसका न तो कपट में कोई हाथ था, और न जो क्रय के समय यह जानता या यह विश्वास करने का कारण रखता था कि कोई कपट किया गया है, अथवा

(ii) भूल के मामले में, उस संव्यवहार के पश्चात् जिसमें भूल की गई. ऐसे व्यक्ति द्वारा मूल्यवान प्रतिफलेन क्रय की गई है, जो न यह जानता या विश्वास करने का कारण रखता था कि भूल की गई है, अथवा

(iii) छिपाई गई दस्तावेज के मामले में, ऐसे व्यक्ति द्वारा मूल्यवान प्रतिफलेन क्रय की गई है जिसका न तो छिपाने में कोई हाथ था और न जो क्रय करने के समय यह जानता या विश्वास करने का कारण रखता था कि वह दस्तावेज छिपाई गई है।

(2) जहां कि किसी निर्णीतऋणी ने किसी डिक्री या आदेश का परिसीमा काल के भीतर निष्पादन कपट या बल प्रयोग द्वारा निवारित कर दिया हो, वहां न्यायालय उक्त परिसीमा काल के अवसान के पश्चात् निर्णीत लेनदार द्वारा किए गए आवेदन पर डिक्री या आदेश के निष्पादन के लिए परिसीमा काल को बढ़ा सकेगा:

परन्तु यह तब जबकि ऐसा आवेदन, यथास्थिति, कपट का पता लगाने की या बल प्रयोग के बन्द होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर किया गया हो।

धारा 17 limitation act

[ limitation act Sec. 17  in English ] –

“ Effect of fraud or mistake ”–

(1) Where, in the case of any suit or application for which a period of limitation is prescribed by this Act,—

(a) the suit or application is based upon the fraud of the defendant or respondent or his agent; or
(b) the knowledge of the right or title on which a suit or application is founded is concealed by the fraud of any such person as aforesaid; or
(c) the suit or application is for relief from the consequences of a mistake; or
(d) where any document necessary to establish the right of the plaintiff or applicant has been fraudulently concealed from him, the period of limitation shall not begin to run until plaintiff or applicant has discovered the fraud or the mistake or could, with reasonable diligence, have discovered it; or in the case of a concealed document, until the plaintiff or the applicant first had the means of producing the concealed document or compelling its production: Provided that nothing in this section shall enable any suit to be instituted or application to be made to recover or enforce any charge against, or set aside any transaction affecting, any property which—

(i) in the case of fraud, has been purchased for valuable consideration by a person who was not a party to the fraud and did not at the time of the purchase know, or have reason to believe, that any fraud had been committed, or
(ii) in the case of mistake, has been purchased for valuable consideration subsequently to the transaction in which the mistake was made, by a person who did not know, or have reason to believe, that the mistake had been made, or
(iii) in the case of a concealed document, has been purchased for valuable consideration by a person who was not a party to the concealment and, did not at the time of purchase know, or have reason to believe, that the document had been concealed.
(2) Where a judgment-debtor has, by fraud or force, prevented the execution of a decree or order within the period of limitation, the court may, on the application of the judgment-creditor made after the expiry of the said period extend the period for execution of the decree or order: Provided that such application is made within one year from the date of the discovery of the fraud or the cessation of force, as the case may be.

धारा 17 limitation act

Limitation act Pdf download in hindi

Section 1 of limitation act Section 1 of limitation act

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here