धारा 163 संविदा अधिनियम | Section 163 Indian Contract act in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “उपनिधाता उपनिहित माल में हुई वृद्धि या उससे हुए लाभ का हकदार | भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 163 क्या है | Section 163 Indian Contract act in Hindi | Section 163 of Indian Contract act | धारा 163 भारतीय संविदा अधिनियम | Bailor entitled to increase or profit from goods bailedके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 163 |  Section 163 of Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 163 in Hindi ] –

उपनिधाता उपनिहित माल में हुई वृद्धि या उससे हुए लाभ का हकदार-

 तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में उपनिहिती वह वृद्धि या लाभ, जो उपनिहित माल से प्रोद्भूत हुआ हो, उपनिधाता को, या उसके निदेशों के अनुसार, परिदत्त करने के लिए आबद्ध है।

दृष्टांत

क एक गौ को देखभाल के लिए ख की अभिरक्षा में छोड़ता है । गौ के बछड़ा पैदा होता है । ख वह गौ और बछड़ा क को परिदत्त करने के लिए आबद्ध है।

धारा 163 Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 163  in English ] –

“Bailor entitled to increase or profit from goods bailed”–

In the absence of any contract to the contrary, the bailee is bound to deliver to the bailor, or according to his directions, any increase or profit which may have accrued from the goods bailed.

Illustration

A leaves a cow in the custody of B to be taken care of. The cow has a calf. B is bound to deliver the calf as well as the cow

to A.

धारा 163 Indian Contract act

भारतीय संविदा अधिनियम 

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Indian contract act 

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Section 1 of limitation actSection 1 of limitation act
Updated: May 10, 2020 — 3:52 pm

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