धारा 141 संविदा अधिनियम | Section 141 Indian Contract act in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “लेनदार की प्रतिभूतियों का फायदा उठाने का प्रतिभू का अधिकार | भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 141 क्या है | Section 141 Indian Contract act in Hindi | Section 141 of Indian Contract act | धारा 141 भारतीय संविदा अधिनियम | Surety’s right to benefit of creditor’s securitiesके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 141 |  Section 141 of Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 141 in Hindi ] –

लेनदार की प्रतिभूतियों का फायदा उठाने का प्रतिभू का अधिकार–

प्रतिभू हर ऐसी प्रतिभूति के फायदे का हकदार है जो उस समय, जब प्रतिभूत्व की संविदा की जाए, लेनदार को मूलऋणी के विरुद्ध प्राप्त हो, चाहे प्रतिभू उस प्रतिभूति के अस्तित्व को जानता हो या नहीं और यदि लेनदार उस प्रतिभूति को खो दे या प्रतिभू की सम्मति के बिना उस प्रतिभूति को विलग कर दे तो प्रतिभू उस प्रतिभूति के मूल्य के परिणाम तक उन्मोचित हो जाएगा।

दृष्टांत

(क) क की प्रत्याभूति पर ग अपने अभिधारी ख को 2,000 रुपए उधार देता है । ग के पास उन 2,000 रुपयों के लिए ख के फर्नीचर के बन्धक के रूप में एक और प्रतिभूति है। ग उस बन्धक को रद्द कर देता है । ख दिवालिया हो जाता है और ख की प्रत्याभूति के आधार पर क के विरुद्ध ग वाद लाता है। क उस फर्नीचर के मूल्य की रकम तक दायित्व से उन्मोचित हो गया है।

(ख) एक लेनदार ग को, जिसका ख को दिया हुआ उधार डिक्री द्वारा प्रतिभूत है, उस उधार के लिए क से भी प्रत्याभूति मिलती है । तत्पश्चात् ग उस डिक्री के निष्पादन में ख के माल को कुर्क करा लेता है, और तब क को जानकारी के बिना उस निष्पादन का प्रत्याहरण कर लेता है। क उन्मोचित हो जाता है।

(ग) ग से ख के लिए उधार प्राप्त करने को ख के साथ संयुक्ततः क एक बन्धपत्र ख के प्रतिभू के तौर पर ग को लिख देता है। तत्पश्चात् ग उसी ऋण के लिए ख से एक अतिरिक्त प्रतिभूति अभिप्राप्त करता है । तत्पश्चात् ग उस अतिरिक्त प्रतिभूति को छोड़ देता है। क उन्मोचित नहीं होता है।

धारा 141 Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 141  in English ] –

“Surety’s right to benefit of creditor’s securities”–

A surety is entitled to the benefit of every security which the creditor has against the principal debtor at the time when the contract of suretyship is entered into, whether the surety knows of the existence of such security or not; and if the creditor loses, or, without the consent of the surety, parts with such security, the surety is discharged to the extent of the value of the security.

Illustrations

(a) C, advances to B, his tenant, 2,000 rupees on the guarantee of A. C has also a further security for the 2,000 rupees by a mortgage of B‟s furniture. C cancels the mortgage. B becomes insolvent and C sues A on his guarantee. A is discharged from liability to the amount of the value of the furniture.

(b) C, a creditor, whose advance to B is secured by a decree, receives also a guarantee for that advance from A. C afterwards takes B‟s goods in execution under the decree, and then, without the knowledge of A, withdraws the execution. A is discharged.

(c ) A, as surety for B, makes a bond jointly with B to C, to secure a loan from C to B. Afterwards, C obtains from B a further security for the same debt. Subsequently, C gives up the further security. A is not discharged.

धारा 141 Indian Contract act

भारतीय संविदा अधिनियम 

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Indian contract act 

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Section 1 of limitation actSection 1 of limitation act
Updated: May 10, 2020 — 11:15 am

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