धारा 13 भ्रष्टाचार अधि. | Section 13 Prevention of corruption act Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ लोक सेवक द्वारा आपराधिक अवचार | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 क्या है | Section 13 Prevention of corruption act in hindi | Section 13 of Prevention of corruption act | धारा 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम | Criminal misconduct by a public servant के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 |  Section 13 of Prevention of corruption act

[ Prevention of corruption act Sec. 13 in Hindi ] –

लोक सेवक द्वारा आपराधिक अवचार–

(1) कोई लोक सेवक आपराधिक अवचार का अपराध करने वाला कहा जाता है,

(क) यदि वह अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए वैध पारिश्रमिक से भिन्न कोई परितोषण ऐसे हेतु या इनाम के रूप में, जैसा धारा 7 में वर्णित है किसी व्यक्ति से अभ्यासतः प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करने के लिए सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है, या

(ख) यदि वह अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चीज प्रतिफल के बिना या ऐसे प्रतिफल के लिए जिसका अपर्याप्त होना वह जानता है किसी ऐसे व्यक्ति से जिसका कि अपने द्वारा या किसी ऐसे लोक सेवक द्वारा, जिसके वह् अधीनस्थ है, की गई या की जा सकने वाली किसी कार्रवाई या कारवार से संबद्ध रहा होना, होना या हो सकना वह जानता है अथवा किसी ऐसे व्यक्ति से जिसका ऐसे संबद्ध व्यक्ति में हितबद्ध या उससे संबंधित होना वह जानता है, अभ्यासतः प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करने के लिए सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है, या

(ग) यदि वह लोक सेवक के रूप में अपने को सौंपी गई या अपने नियंत्रणाधीन किसी संपत्ति का अपने उपयोग के लिए बेइमानी से या कपटपूर्वक दुर्विनियोग करता है या उसे अन्यथा संपरिवर्तित कर लेता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने देता है, या (च) यदि वह

(i) भ्रष्ट या अवैध साधनों से अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चीज या धन संबंधी फायदा अभिप्राप्त करता है ; या

(ii) लोक सेवक के रूप में अपनी स्थिति का अन्यथा दरुपयोग करके अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चीज या धन संबंधी फायदा अभिप्राप्त करता है ; या

(ii) लोक सेवक के रूप में पद धारण करके किसी व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चीज या धन संबंधी फायदा बिना किसी लोक हित के अभिप्राप्त करता है ; या

(ङ) यदि उसके या उसकी ओर से किसी व्यक्ति के कब्जे में ऐसे धन संबंधी साधन तथा ऐसी संपत्ति है जो उसकी आय के ज्ञात स्रोतों की अननुपातिक है अथवा उसके पद की कालावधि के दौरान किसी समय कब्जे में रही है जिसका कि वह लोक सेवक, समाधानप्रद लेखा-जोखा नहीं दे सकता।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए “आय के ज्ञात स्रोत से अभिप्रेत है किसी विधिपूर्ण स्रोत से प्राप्त आय, जिस प्राप्ति की संसूचना, लोक सेवक को तत्समय लागू किसी विधि, नियमों या आदेशों के उपबंधों के अनुसार दे दी गई है।

(2) कोई लोक सेवक जो आपराधिक अवचार करेगा इतनी अवधि के लिए, जो चार वर्ष) से कम की न होगी किंतु जो दस वर्ष) तक की हो सकेगी, कारावास से दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

धारा 13 Prevention of corruption act

[ Prevention of corruption act Sec. 13 in English ] –

Criminal misconduct by a public servant”–

(1) A public servant is said to commit the offence of criminal misconduct,— 

(a) if he habitually accepts or obtains or agrees to accept or attempts to obtain from any person for himself or for any other person any gratification other than legal remuneration as a motive or reward such as is mentioned in section 7; or 

(b) if he habitually accepts or obtains or agrees to accept or attempts to obtain for himself or for any other person, any valuable thing without consideration or for a consideration which he knows to be inadequate from any person whom he knows to have been, or to be, or to be likely to be concerned in any proceeding or business transacted or about to be transacted by him, or having any connection with the official functions of himself or of any public servant to whom he is subordinate, or from any person whom he knows to be interested in or related to the person so concerned; or 

(c) if he dishonestly or fraudulently misappropriates or otherwise converts for his own use any property entrusted to him or under his control as a public servant or allows any other person so to do; or 

(d) if he,— 

(i) by corrupt or illegal means, obtains for himself or for any other person any valuable thing or pecuniary advantage; or 

(ii) by abusing his position as a public servant, obtains for himself or for any other person any valuable thing or pecuniary advantage; or 

(iii) while holding office as a public servant, obtains for any person any valuable thing or pecuniary advantage without any public interest; or 

(e) if he or any person on his behalf, is in possession or has, at any time during the period of his office, been in possession for which the public servant cannot satisfactorily account, of pecuniary resources or property disproportionate to his known sources of income. 

Explanation.—For the purposes of this section, “known sources of income” means income received from any lawful source and such receipt has been intimated in accordance with the provisions of any law, rules or orders for the time being applicable to a public servant. 

(2) Any public servant who commits criminal misconduct shall be punishable with imprisonment for a term which shall be not less than 3[four years] but which may extend to 4[ten years] and shall also be liable to fine. 

धारा 13 Prevention of corruption act

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम  

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Updated: May 17, 2020 — 3:14 pm

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