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धारा 109 सम्पत्ति अन्तरण | Section 109 of Transfer of property Act

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Section 109 of Transfer of property Act

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “पट्टाकर्ता के अंतरिती के अधिकार | सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 109 क्या है | Section 109 Transfer of property Act in hindi | Section 109 of Transfer of property Act | धारा 109 सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम | Rights of lessor’s transferee के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 109 |  Section 109 of Transfer of property Act | Section 109 Transfer of property Act in Hindi

[ Transfer of property Act Section 109 in Hindi ] –

पट्टाकर्ता के अंतरिती के अधिकार-

यदि पट्टाकर्ता पट्टे पर दी हुई सम्पत्ति को या उसके किसी भाग को या उसमें के अपने हित के किसी भाग को अन्तरित कर देता है तो अन्तरिती तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में उस अन्तरित सम्पत्ति या भाग के बारे में पट्टाकर्ता के वे सब अधिकार तब तक रखेगा और यदि पट्टेदार ऐसा निर्वाचन करे तो पट्टाकर्ता के सब दायित्वों के अध्यधीन तब तक रहेगा, जब तक वह उसका स्वामी रहता है, किन्तु पट्टाकर्ता का पट्टे द्वारा अपने पर अधिरोपित दायित्वों में से किसी के अध्यधीन रहना

केवल ऐसे अन्तरण के कारण ही परिविरत न हो जाएगा, जब तक कि पट्टेदार अन्तरिती को अपने प्रतिदायी व्यक्ति मानने का निर्वाचन न कर ले:

परन्तु अन्तरिती अन्तरण से पहले के भाटक के शोध्य बकायों का हकदार नहीं है, और यदि पट्टेदार यह विश्वास करने का कारण न रखते हुए कि ऐसा अन्तरण किया गया है, पट्टाकर्ता को भाटक दे देता है, तो पट्टेदार अन्तरिती को ऐसा भाटक पुनः देने का दायी न होगा।

पट्टाकर्ता, अन्तरिती और पट्टेदार यह अवधारित कर सकेंगे कि पट्टे द्वारा आरक्षित प्रीमियम या भाटक का कौन सा अनुपात इस प्रकार अन्तरित भाटक के लिए देय है और उनमें असहमति होने की दशा में ऐसा अवधारण ऐसे किसी भी न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा जो पट्टे पर दी गई सम्पत्ति के कब्जे के लिए वाद को ग्रहण करने की अधिकारिता रखता हो।

धारा 109 Transfer of property Act

[ Transfer of property Act Sec. 109 in English ] –

Rights of lessor’s transferee ”–

If the lessor transfers the property leased, or any part thereof, or any part of his interest therein, the transferee, in the absence of a contract to the contrary, shall possess all the rights and, if the lessee so elects, be subject to all the liabilities of the lessor as to the property or part transferred so long as he is the owner of it; but the lessor shall not, by reason only of such transfer, cease to be subject to any of the liabilities imposed upon him by the lease, unless the lessee elects to treat the transferee as the person liable to him: 

Provided that the transferee is not entitled to arrears of rent due before the transfer, and that, if the lessee, not having reason to believe that such transfer has been made, pays rent to the lessor, the lessee shall not be liable to pay such rent over again to the transferee. 

The lessor, the transferee and the lessee may determine what proportion of the premium or rent reserved by the lease is payable in respect of the part so transferred, and, in case they disagree, such determination may be made by any Court having jurisdiction to entertain a suit for the possession of the property leased. 

धारा 109 Transfer of property Act 

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम  

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Transfer of property Act

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Pocso Act sections list Domestic violence act sections list

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