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धारा 105e CrPC | Section 105e CrPC in Hindi | CrPC Section 105e

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section 105e CrPC in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “सम्पत्ति का अभिग्रहण या कुर्की | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 105e क्या है | section 105e CrPC in Hindi | Section 105e in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 105e | Seizure or attachment of propertyके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 105e |  Section 105e in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 105e in Hindi ] –

सम्पत्ति का अभिग्रहण या कुर्की-

(1) जहां धारा 105च के अधीन जांच या अन्वेषण करने वाले किसी अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी संपत्ति के, जिसके संबंध में ऐसी जांच या अन्वेषण किया जा रहा है, छिपाए जाने, अंतरित किए जाने या उसके विषय में किसी रीति से व्यवहार किए जाने की संभावना है जिसका परिणाम ऐसी संपत्ति का ब्ययन होगा वहाँ वह उक्त संपत्ति का अभिग्रहण करने का आदेश कर सकेगा और जहां ऐसी संपत्ति का अभिग्रहण करना साध्य नहीं है वहां वह कुर्की का आदेश यह निदेश देते हुए कर सकेगा कि ऐसी संपत्ति ऐसा आदेश करने वाले अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना अंतरित नहीं की जाएगी या उसके विषय में अन्यथा व्यवहार नहीं किया जाएगा और ऐसे आदेश की एक प्रति की तामील संबंधित व्यक्ति पर की जाएगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश का तब तक कोई प्रभाव नहीं होगा, जब तक उक्त आदेश की, उसके किए जाने से तीस दिन की अवधि के भीतर उक्त न्यायालय के आदेश द्वारा पुष्टि नहीं कर दी जाती है।

धारा 105e CrPC

[ CrPC Sec. 105e in English ] –

“ Seizure or attachment of property ”–

  1. Where any officer conducting an inquiry or investigation under section 105D has a reason to believe that any property in relation to which such inquiry or investigation is being conducted is likely to be concealed, transferred or dealt with in any manner which will result in disposal of such property, he may make an order for seizing such property and where it is not practicable to seize such property, he may make an order of attachment directing that such property shall not be transferred or otherwise dealt with, except with the prior permission of the officer making such order, and a copy of such order shall be served on the person concerned.
  2. Any order made under Sub-Section (1) shall have no effect unless the said order is confirmed by an order of the said Court, within a period of thirty days of its being made.

धारा 105e CrPC

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