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Pratibha patil biography | प्रतिभा पाटिल की जीवनी

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Pratibha patil biography

Pratibha patil biography | प्रतिभा पाटिल की जीवनी

Pratibha patil biography

Pratibha patil biography

पूरा नाम :- प्रतिभा देवीसिंह शेखावत
जन्म :-  19 दिसम्बर 1934
जन्मस्थान :-  नाडेगाव, जि .बोदवड, महाराष्ट्र
पिता :-  नारायण राव पाटिल

Pratibha patil biography

 प्रतिभा पाटिल का जन्म ‘जलगाँव’ के ‘नदगाँव’ नामक ग्राम में 19 दिसम्बर, 1934 को हुआ था। इनके पिता का नाम ‘नारायण राव पाटिल’ था, जो पेशे से सरकारी वकील थे। उस समय देश पराधीनता की जंजीरों में जकड़ा हुआ था।

ऐसे में यह कल्पना करना कि देश स्वाधीन होगा और स्वाधीन भारत की महामहिम राष्ट्रपति नदगाँव ग्राम की एक बेटी बनेगी, सर्वथा असम्भव ही था।

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        उन्होंने अपने करियर की शुरुवात जलगाव के जिला कोर्ट में शामिल होकर की. 27 साल की आयु में ही उन्हें महाराष्ट्र राज्य विधानमंडल के जलगाव निर्वाचन क्षेत्र में चुना गया.

लगातार 4 वर्षो तक वे मुक्ताई नगर निर्वाचन क्षेत्र से MLA नियुक्त की गयी. साथ ही वे महाराष्ट्र निर्वाचन क्षेत्र के कई पदों पर भी विराजमान थी. 1967 से 1972 तक, उन्होंने स्थानिक शिक्षामंत्री के रूप में सेवा की, और साथ कई सामाजिक कार्य भी करते रहे.

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उन्हें शिक्षा, स्वास्थ और ग्रामीण विकास से संबंधित कई कार्य किये. प्रतिभा ताई पाटिल महाराष्ट्र निर्वाचन क्षेत्र के नेता के रूप में काम करती थी. और इसके साथ ही वह राज्यसभा में व्यापारी सलाहकार समिति की अध्यक्ष भी थी.

8 नवम्बर 2004 को वह राजस्थान की राज्यपाल बनी और 2007 तक उस पद पे विराजमान रही. 25 जुलाई 2007 को, वह भारत के 12 वे राष्ट्रपति के रूप में विराजमान रही.

 राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल ने अपने प्रतिद्वंदी भैरोसिंह शेखावत को तीन लाख से ज्यादा मतों से हराया था.

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1982 से 1985 तक वे फिर से वे महाराष्ट्र सरकार में शहरी विकास और आवास तथा 1985 में वे राज्यसभा पहोची और 1986 में राज्यसभा की उप-सभापति बनी. पाटिल प्रदेश कांग्रेस समिति, महाराष्ट्र की अध्यक्षा (1988-1990), राष्ट्रिय शहरी सहकारी बैंक संस्थाओ की निदेशक, भारतीय राष्ट्रिय सहकारी संघ की शासी परिषद की सदस्य रह चुकी है. और साथ ही वे राष्ट्रिय सामाजिक समाज कल्याण कांफ्रेंस में भी उपस्थित रह चुकी है.

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 प्रतिभा पाटिल का विद्यार्थी जीवन 

         प्रतिभा पाटिल के पिता सरकारी वकील थे, इस कारण परिवार में बेटी की शिक्षा के लिए अनुकूल माहौल था। प्रतिभा पाटिल ने आरम्भिक शिक्षा नगरपालिका की प्राथमिक कन्या पाठशाला से आरम्भ की थी।

कक्षा चार तक की पढ़ाई श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने उसी पाठशाला में की। फिर इन्होंने जलगाँव के नये अंग्रेज़ी स्कूल में कक्षा पाँच में दाखिला ले लिया। वर्तमान में उस स्कूल को ‘आर.आर. विद्यालय’ के नाम से जाना जाता है।

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विद्यालय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करते हुए भी प्रतिभा पाटिल ने अपने व्यक्तित्व का विकास अन्य गतिविधियों में लिप्त रहते हुए किया। भाषण, वाद-विवाद एवं खेलकूद की गतिविधियों में भी प्रतिभा पाटिल का वैशिष्ट्य भाव उभरकर सामने आया।

वह मात्र शैक्षिक पुस्तकों में ही लिप्त नहीं रहती थीं, वरन् व्यक्तित्व के सभी पहलुओं की ओर उनका ध्यान था। प्रतिभा पाटिल को शास्त्रीय संगीत के प्रति भी गहरा लगाव था। टेबल टेनिस की भी वह निपुण खिलाड़ी थीं।

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 प्रतिभा पाटिल द्वारा किये गये कुछ मुख्य कार्य 

        उन्होंने भारत की महिलाओं और बच्चों के कल्याण और समाज के उपेक्षित वर्गों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने उनकी प्रगति के लिए विभिन्न संस्थानों की स्थापना की।उन्होंने मुंबई और दिल्ली में काम करने वाली महिलाओं के लिए हॉस्टल की स्थापना की, ग्रामीण युवाओं के लिए जलगांव में एक इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की।

श्रम साधना ट्रस्ट जो कि महिलाओं की उन्नति के लिए कई कल्याणकारी गतिविधियों में शामिल है।

        उन्होंने नेत्रहीन विकलांगों बच्चों के लिए जलगांव में एक औद्योगिक प्रशिक्षण स्कूल भी स्थापित किया है। विमुक्ता जातियों (नॉमैडीक जनजाति) और पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए स्कूल स्थापित किया।

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इसके अलावा, उन्होंने महाराष्ट्र अमरावती में एक कृषि विज्ञान केंद्र (किसान प्रशिक्षण केंद्र) खोल दिया है।

        उन्होंने महिला विकास महामंडल की नींव में एक क्रांतिकारी भूमिका निभाई जिसमें महाराष्ट्र राज्य सरकार ने महिलाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अमरावती, महाराष्ट्र में गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए संगीत, कंप्यूटर और सिलाई कक्षाएं आयोजित करने में भी विशेष योगदान दिया।

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सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ

        उन्होंने महिलाओं के कल्याण के लिए कार्य किया और मुम्बई, दिल्ली में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास, ग्रामीण युवाओं के लाभ हेतु जलगांव में इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा श्रम साधना न्यास की स्थापना की।

श्रीमती पाटिल ने महिला विकास महामण्डल, जलगांव में दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय और विमुक्त जमातियों तथा बंजारा जनजातियों के निर्धन बच्चों के लिए एक स्कूल की स्थापना की।

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श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने अनेक यात्राएं की है और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ सोशल वेलफेयर कॉन्फ्रेंस, नैरोबी और पोर्टे रीको में भाग लिया। उन्होंने १९८५ में इस सम्मेलन में शिष्टमण्डल के सदस्य के रूप में बुल्गारिया में, महिलाओं की स्थिति पर ऑस्ट्रिया के सम्मेलन में शिष्टमण्डल की अध्यक्ष के रूप में, लंदन में १९८८ के दौरान आयोजित राष्ट्रमण्डलीय अधिकारी सम्मेलन में, चीन के बीजिंग शहर में विश्व महिला सम्मेलन में भाग लिया।

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        श्रीमती पाटिल की विशेष रुचि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और महिलाओं के कल्याण में है। श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने जलगांव जिले में महिला होम गार्ड का आयोजन किया और १९६२ में उनकी कमांडेंट थीं, वे राष्ट्रीय सहकारी शहरी बैंक और ऋण संस्थाओं की उपाध्यक्ष रहीं तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति, महाराष्ट्र की अध्यक्षा थीं।

श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने अमरावती में दृष्टिहीनों के लिए एक औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय, निर्धन और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई कक्षाओं, पिछड़े वर्गों और अन्य पिछड़े वर्गों के बच्चों के लिए नर्सरी स्कूल खोल कर उल्लेखनीय योगदान दिया

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        प्रतिभाजी महाराष्ट्र विधानसभा में वे कई साल तक अलग-अलग पदों पर कार्यरत रही। साल 1967-72 के बीच उन्होंने शिक्षा के उप मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।

इसके बाद वे राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंक एवं ऋण संस्थाओं की निदेशक तथा भारतीय संघ की शासी परिषद की सदस्य रही। 8 नवंबर 2004 को वे राजस्थान की गर्वनर बनाई गई। साल 2007 में उन्हें राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।

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राजनीति के अलावा प्रतिभाजी कई सामाजिक कार्यो में भी संलग्न रही। उन्होंने महिलाओं के कल्याण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बहुत से कार्य किए। जलगांव जिले में उन्होंने महिला होम गार्ड की स्थापना की।

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निर्धन और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई, संगीत एवं कम्प्यूटर की कक्षाएं भी खुलवाई। बच्चों के लिए नर्सरी स्कूल की स्थापना कीं।

राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने महिला विकास की ओर विशेष ध्यान दिया। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने महिला व बाल विकास के लिए कई नियमों का उल्लेखन करवाया।

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वे पद पर रहते हुए एक अच्दी सामाजिक कार्यकर्ता भी थी वे खुद समय-समय पर बच्चों एवं महिलाओं से मिलकर उनकी समस्या सुनती थी और उसके निवारण के लिए तुरंत कदम उठाती थी।

राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए उन्होंने कई कल्याण्कारी कार्य किए। 25 जुलाई 2012 को उनका कार्यकाल खत्म हुआ और वे अब पूरी तरह सामाजिक कार्यकर्ता की ज़िन्दगी जी रही है। 

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