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लिंग किसे कहते हैं | Definition of Gender | Ling kise kahate hain

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Ling kise kahate hain

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ लिंग किसे कहते हैं | Definition of Gender | Ling kise kahate hain“, के बारे में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा ।

लिंग किसे कहते हैं | Definition of Gender | Ling kise kahate hain

‘लिंग’ का शाब्दिक अर्थ है—चिह्न । शब्द के जिस रूप से यह जाना जाय कि वर्णित वस्तु या व्यक्ति पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे लिंग कहते हैं। लिंग के द्वारा संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों की जाति का बोध होता है।

हिन्दी में दो लिंग हैं—पुंलिंग (Masculine) और स्त्रीलिंग (Feminine)। पुंलिंग का संधि विच्छेद : है—पुम् + लिंग। पुम् + लिंग में म् का अनुस्वार हो जाता है, अतः पुंलिंग लिखना चाहिए।

हिन्दी में लिंग निर्धारण 

इसके लिए निम्न आधार ग्रहण किए जाते हैं-1. रूप के आधार पर, 2. प्रयोग के आधार पर एवं 3. अर्थ के आधार पर

1. रूप के आधार पर – रूप के आधार पर लिंग निर्णय का तात्पर्य है—शब्द की व्याकरणिक बनावट । शब्द की रचना में किन प्रत्ययों का प्रयोग हुआ है तथा शब्दान्त में कौन-सा स्वर है—इसे आधार बनाकर शब्द के लिंग का निर्धारण किया जाता है। जैसे-

(i) पुंलिंग शब्द

1-अकारान्त, आकारान्त शब्द प्रायः पुलिंग होते हैं। जैसेराम, सूर्य, क्रोध, समुद्र, चीता, घोड़ा, कपड़ा, घड़ा आदि

2-वे भाववाचक संज्ञाएं जिनके अन्त में त्व, व, य होता है, वे प्रायः पुंलिंग होती हैं। जैसे—गुरुत्व, गौरव, शौर्य आदि ।

3 – जिन शब्दों के अन्त में पा, पन, आव, आवा, खाना जुड़े होते हैं, वे भी प्रायः पुंलिंग होते हैं। जैसे—बुढ़ापा, मोटापा, बचपन, घुमाव, भुलावा, पागलखाना।

(ii) स्त्रीलिंग शब्द

1 – आकारान्त शब्द स्त्रीलिंग होते हैं । जैसे—लता, रमा, ममता ।

2 – इकारान्त शब्द भी प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं—रीति, तिथि, हानि (किन्तु इसके अपवाद भी हैं—कवि, कपि, रवि पुंलिंग हैं)

3 – ईकारान्त शब्द भी प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे—नदी, रोटी, टोपी, (किन्तु अपवाद भी हैं। जैसे—हाथी, दही, पानी पुंलिंग हैं)

4 – आई, इया, आवट, आहट, ता, इमा प्रत्यय वाले शब्द भी स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे-लिखाई, डिबिया, मिलावट, घबराहट, सुन्दरता, महिमा।

स्त्रीलिंग प्रत्यय : पुंलिंग शब्द को स्त्रीलिंग बनाने के लिए कुछ प्रत्ययों को शब्द में जोड़ा जाता है जिन्हें स्त्री० प्रत्यय कहते हैं।

संस्कृत के स्त्री प्रत्यय उदाहारण -आ

छात्र-छात्रा, महोदय-महोदया -आनी

इन्द्र-इन्द्राणी, रूद्र-रूद्राणी -इका

गायक-गायिका, नायक-नायिका -इनी

यक्ष-यक्षिणी, योगी-योगिनी

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2 – प्रयोग के आधार पर – प्रयोग के आधार पर लिंग निर्णय के लिए संज्ञा शब्द के साथ प्रयुक्त विशेषण, कारक चिह्न एवं क्रिया को आधार बनाया जा सकता है। जैसे-

1. अच्छा लड़का, अच्छी लड़की।

(लड़का पुंलिंग, लड़की स्त्रीलिंग)

2. राम की पुस्तक, राम का चाकू।

(पुस्तक स्त्रीलिंग है, चाकू पुंलिंग है)

3. राम ने रोटी खाई। (रोटी स्त्रीलिंग, क्रिया स्त्रीलिंग)

राम ने आम खाया। (आम पुंलिंग, क्रिया पुलिंग)

 

3 – अर्थ के आधार पर – कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से समान होते हुए भी लिंग की दृष्टि से भिन्न होते हैं। उनका उचित एवं सम्यक प्रयोग करना चाहिए। जैसे-

1. आपकी महान कृपा होगी–अशुद्ध वाक्य

आपकी महती कृपा होगी-शुद्ध वाक्य

2. वह एक विद्वान लेखिका है—अशुद्ध वाक्य

वह एक विदुषी लेखिका है—शुद्ध वाक्य

वाक्य रचना में लिंग संबंधी अनेक अशुद्धियां होती हैं । सजग एवं सचेत रहकर ही इन अशुद्धियों का निराकरण हो सकता है।

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