संविधान अनुच्छेद 101 | Article 101 of Indian Constitution in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको स्थानों का रिक्त होना  | भारतीय संविधान अनुच्छेद 101 | Article 101 of Indian Constitution in Hindi | Article 101 in Hindi | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 101 | Vacation of seatsके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविधान अनुच्छेद 101 | Article 101 of Indian Constitution in Hindi

[ Indian Constitution Article 101 in Hindi ] –

स्थानों का रिक्त होना–

(1) कोई व्यक्ति संसद के दोनों सदनों का सदस्य नहीं होगा और जो व्यक्ति दोनों सदनों का सदस्य चुन लिया जाता है उसके एक या दूसरे सदन के स्थान को रिक्त करने के लिए संसद विधि द्वारा उपबंध  करेगी ।

(2) कोई व्यक्ति संसद और किसी [37]* * * राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन, दोनों का सदस्य नहीं होगा और यदि कोई व्यक्ति संसद और [38][किसी  राज्य] के विधान-मंडल के किसी सदन, दोनों का सदस्य चुन लिया जाता है तो ऐसी  अवधि की समाप्ति के पश्चात्  जो राष्ट्रपति द्वारा बनाएं गए नियमों[39] में विनिर्दिष्ट की जाएं, संसद में ऐसे व्यक्ति का स्थान रिक्त हो जाएगा यदि उसने राज्य के विधान-मंडल में अपने स्थान को पहले ही नहीं त्याग दिया है ।

(3) यदि संसद के किसी सदन का सदस्य —

(क) [40][अनुच्छेद 102 के खंड (1) या खंड(2)] में वार्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो जाता है, या

[41][(ख) यथास्थिति, सभापति या अध्यक्ष को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने स्थान का त्यागकर देता है और उसका त्यागपत्र , यथास्थिति, सभापति या अध्यक्ष द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है,] तो ऐसा होने पर उसका स्थान रिक्त हो जाएगा :

[42][परन्तु उपखंड (ख) में निर्दिष्ट त्यागपत्र  की दशा में, यदि प्राप्त जानकारी से या अन्यथा और ऐसी जांच करने के पश्चात् , जो वह ठीक समझे, यथास्थिति, सभापति या अध्यक्ष का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा त्यागपत्र स्वैाच्छिक या असली नहीं है तो वह ऐसे त्यागपत्र को स्वीकर नहीं करेगा ।]

(4) यदि संसद के किसी सदन का कोई सदस्य साठ दिन की अवधि तक सदन की अनुज्ञा के बिना उसके सभी अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है तो सदन उसके स्थान को रिक्त घोषित कर सकेगा :

परन्तु साठ दिन की उक्त अवधिकी संगणना करने में किसी ऐसी अवधि को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसके दौरान सदन सत्रावसित या निरंतर चार से अधिक दिनों के लिए स्थगित रहता है ।

भारतीय संविधान अनुच्छेद 101

[ Indian Constitution Article 101 in English ] –

Vacation of seats”–

(1) No person shall be a member of both Houses of Parliament and provision shall be made by Parliament by law for the vacation by a person who is chosen a member of both Houses of his seat in one House or the other. 

(2) No person shall be a member both of Parliament and of a House of the Legislature of a State 2***, and if a person is chosen a member both of Parliament and of a House of the Legislature of13[a State], then, at the expiration of such period as may be specified in rules4 made by the President, that person’s seat in Parliament shall become vacant, unless he has previously resigned his seat in the Legislature of the State. 

(3) If a member of either House of Parliament— 

(a) becomes subject to any of the disqualifications mentioned in 5[clause (1) or clause (2) of article 102], or 6[(b) resigns his seat by writing under his hand addressed to the Chairman or the Speaker, as the case may be, and his resignation is accepted by the Chairman or the Speaker, as the case may be,] 

his seat shall thereupon become vacant: 

7[Provided that in the case of any resignation referred to in sub-clause (b), if from information received or otherwise and after making such inquiry as he thinks fit, the Chairman or the Speaker, as the case may be, 

is satisfied that such resignation is not voluntary or genuine, he shall not accept such resignation.] 

(4) If for a period of sixty days a member of either House of Parliament is without permission of the House absent from all meetings thereof, the House may declare his seat vacant: 

Provided that in computing the said period of sixty days no account shall be taken of any period during which the House is prorogued or is adjourned for more than four consecutive days. 


भारतीय संविधान अनुच्छेद 101

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Updated: August 10, 2020 — 8:42 am

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